चैतन्य शर्मा

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मैं चैतन्य एक बहुत अच्छा बच्चा हूँ | मैं 9 साल का हूँ | मुझे ड्राइंग-कलरिंग करना बहुत पसंद है | मैं क्लास IV में पढ़ता हूँ और माँ को कभी परेशान नहीं करता | मुझे डांस करना बेहद पसंद है | स्कूल में मुझे सब बहुत पसंद करते हैं | यह ब्लॉग 5 साल पहले मेरी माँ डॉ. मोनिका शर्मा ने बनाया था । अब मैं खुद अपने पोस्ट ब्लॉग पर शेयर करता हूँ । इस ब्लॉग पर मैं अपनी सारी बातें शेयर करूंगा |

Thursday, July 28, 2011

समर वेकेशन ट्रिप -1 न्यूयॉर्क .....!

दो हफ्ते बाद मैं फिर अपने ब्लॉग पर आ गया हूँ | छुट्टियाँ चल रही हैं इसलिए इस बार थोड़े लम्बे ट्रिप पर  जाने का प्लान किया | मेरा पहला  पड़ाव रहा न्यूयॉर्क | खूब मज़ा आया | इस शहर में कुछ जगहों के बारे में जाना और जम कर मस्ती की | 










उसके बाद मैं बच्चों की पसंदीदा जगह डिजनीलैंड भी  गया .......  वो अगली पोस्ट में.... : )

Tuesday, July 12, 2011

माँ पापा को घुमाने ले जा रहा हूँ....!

समर टाइम.....फन टाइम 


आजकल स्कूल की छुट्टियाँ चल रही हैं | खूब आराम है | घूमना, खेलना ...देर तक सोना | अब एक लम्बे ट्रिप पर जाने का प्लान बना है .... | 

माँ पापा को घुमाने ले जा रहा हूँ......  :)
अरे सही कह रहा हूँ अगर हम बच्चे ना चाहें तो बड़े कहाँ घूमने जा सकते हैं ...? नहीं ना...! तो अब कुछ दिन ब्लोग्गिं से भी छुट्टी रहेगी | 

 कुछ दिन बाद फिर हाज़िर होता हूँ मेरी अच्छी बातें और शरारतें लेकर ...!

Sunday, July 10, 2011

Calgary Stempede...A Special Parade....!

हर साल कैलगरी में होने वाला Stempede  Parade  बहुत स्पेशल इवेंट होता है | यह दुनिया का सबसे बड़ा आउटडोर इवेंट है | इस परेड में खास तौर से घोड़े और काउबॉयज शामिल होते हैं | परेड में शामिल होने वाले और देखने वाले काफी लोगों ने काउबॉय हैट्स पहन रखा था |  देखिये कुछ फोटोस .....










मैंने पापा के कन्धों पर बैठ  के देखी परेड ....

और मैं हूँ... काउबॉय चैतन्य .....

Saturday, July 9, 2011

प्यारे चैतन्य को समर्पित मेरी नयी कविता..!





नन्हा सा प्यारा चैतन्य , 
इसको पाकर जग है धन्य . 

होनहार है , समझदार है , 
यह तो खुद ही पुरस्कार है . 
                                                               
   जिसको भी अपनाता है  ,

                         खुशियाँ उसे लुटाता है . 


मन में सुख भर देता है , 
यह खुशियों का नेता है . 

इसका जलवा ! क्या कहना ! 
यों ही सदा सक्रिय रहना .

यों ही सबको भाना जी , 
जग में नाम कमाना जी . 





डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'
हिंदी के बाल साहित्यकार ,
 बाल साहित्य समीक्षक एवं कवि ; 
शिक्षा : एम्. ए. {हिंदी, संस्कृत }, एम्. काम. एम्. एड. , पी. एच. डी. [विषय : बाल साहित्य के समीक्षा सिद्धांत }, स्लेट [ हिंदी, शिक्षा शास्त्र ] ;
सम्प्रति : प्राध्यापक एवं विभागाद्यक्ष , बी. एड. राजेंद्र प्रसाद पी. जी. कालेज , मीरगंज, बरेली . 
. प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओं में बच्चों के लिए कहानी , कविता , एकांकी , पहेलियाँ और यात्रावृत्त प्रकाशित . रचनाओं के अंग्रेजी, पंजाबी , गुजराती , सिंधी , मराठी , नेपाली , कन्नड़ , उर्दू , उड़िया आदि अनेक भाषाओं में अनुवाद .
 अनेक रचनाएँ दूरदर्शन तथा आकाशवाणी के नई दिल्ली , लखनऊ , रामपुर केन्द्रों से प्रसारित .

प्रकशित पुस्तकें :-
१. नेहा ने माफ़ी मांगी २. आधुनिक बाल कहानियां ३. अमरुद खट्टे हैं ४.मोती झरे टप- टप ५. अपमान का बदला ६. भाग गए चूहे ७.दीदी का निर्णय ८.मुझे कुछ नहीं चहिए ९.यस सर नो सर
बालकाव्य : १.चल मेरे घोड़े २.अपलम चपलम ; बाल एकांकी : छोटे मास्टर जी ;सम्पादित : १.न्यारे गीत हमारे २. किशोरों की श्रेष्ठ कहानियां ३.बालिकाओं की श्रेष्ठ कहानियां
आलोचना ग्रन्थ : बाल साहित्य के प्रतिमान , कविता संग्रह : तुम्हारे लिए 

ब्लाग :- http://abhinavsrijan.blogspot.com/   http://baal-mandir.blogspot.com/



यह कविता नागेश पाण्डेय 'संजय' अंकल ने लिख भेजी है मेरी ओर से उन्हें हार्दिक धन्यवाद ....आभार , इतनी प्यारी कविता के लिए....!

Tuesday, July 5, 2011

मुझे मिल गयी पी. जी. की डिग्री ....!




बहुत मोटी होती है पी. जी. की डिग्री...!
मैं पी. जी. पास हो गया हूँ |  सुबह सुबह जल्दी उठना, स्कूल जाना और वहां पढना लिखना भी | बहुत मेहनत की है तो जाकर मुझे पी .जी . यानि की प्ले ग्रुप की डिग्री मिल गयी है | एक मोटी सी फाइल मेरे माँ पापा को दी गयी है जिसमें मेरे क्लास वर्क के पजेज सहेजे हुए हैं | 















ऐसे  ही  बहुत  सारे पेजेज हैं इस साल भर की फाइल में |   वैसे अभी दो महीने स्कूल की छुट्टियाँ हैं और सितम्बर में फिर से नए सेशन की शुरुआत होगी नई क्लास के साथ | फ़िलहाल मैं खुश हूँ कि मैं भी पी. जी. पास हो गया हूँ |  मेरे पास भी है अब प्ले ग्रुप की डिग्री... :)

Sunday, July 3, 2011

उठो,जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक मत रुको !


उठो, जागो व लक्ष्य को प्राप्त होने तक न ठहरो .....! यह विचार देकर पूरे विश्व के लाखों करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत बने स्वामी विवेकानंद की आज पुण्यतिथि है | सात समुन्दर पार बरसों पहले  शिकागो में दिया उनका भाषण पूरी दुनिया कभी नहीं भुला पायेगी | उन्होंने हम सभी से दृढ निश्चयी और कर्मशील बनने की बात कही .... अच्छा भारतीय और अच्छा इन्सान बनने की प्रेरणा दी .... उन्होंने कहा ....

 "हमारी नैतिक प्रकृति जितनी उन्नत होती है, उतना ही उच्च हमारा प्रत्यक्ष अनुभव होता है, और उतनी ही हमारी इच्छा शक्ति अधिक बलवती होती है।"


उनका हर विचार इसी बात  से जुड़ा था कि हम सबको भारतीय होने का गर्व होना चाहिए ...  है न बहुत सुंदर और प्यारा विचार ....हमारे राष्ट्र गौरव स्वामी विवेकानंद को हार्दिक श्रृद्धांजलि ..नमन 
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