चैतन्य शर्मा

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मैं चैतन्य, 17 साल का हूँ | मैं कॉलेज में पढ़ता हूँ | यह ब्लॉग 15 साल पहले मेरी माँ डॉ. मोनिका शर्मा ने बनाया था । अब मैं खुद अपने पोस्ट मेरे इस ब्लॉग पर शेयर करता हूँ ।

Sunday, August 17, 2014

ओ कान्हा सिखलाओ ना

जन्माष्टमी की शुभकामनाएं आप सभी को । आज मेरी बनाई कान्हा की ड्राइंग और मां की लिखी कविता ।


कैसे जीतें  जीवन रण को 
उल्लासित करलें हर क्षण को
ओ कान्हा सिखलाओ ना

कैसे झट मैया को मना लें 
प्यारी प्यारी बातें बना लें
ओ कान्हा बतलाओ ना

संकट में भी मुस्काएं हम
रीति नीति सब पायें हम
ओ कान्हा समझाओ ना

सखा भाव को कभी ना भूलें
प्रकृति माँ की गोद में झूलें
ओ कान्हा सिखलाओ ना



Thursday, August 7, 2014

बंदर भैया


बंदर भैया बदले बदले
लटक-मटक कर चलते 
कभी तो चलते सीधे सीधे 
कभी घूम के  पलटते

अम्मा पूछे, बेटा बंदर 

अजब गजब हैं कपड़े पहने 
नए नए से लगते हो तुम 
हाथ कान में गहने पहने 

बंदर बोला मैं तो अम्मा 

कैटवॉक करूंगा 
छोड़ूंगा पेड़ों पर चढ़ना
स्टाइल  से चलूँगा  

अम्मा बोली बंदर बेटा 

क्या तेरे मन में आया 
उछाल कूद छोड़कर यूं 
बिल्ली बनना क्यों भाया   


नेशनल दुनिया अख़बार में प्रकाशित यह कविता मेरी माँ ने लिखी है । 

Sunday, July 27, 2014

आओ सहेजें धरा को

आज  World Nature Conservation Day है । प्रकृति को बचाने  और सहेजने का सन्देश देने वाला खास दिन । पर धरती माँ  पेड़ों पौधों को सहेजने के लिए तो हर दिन खास है क्योंकि प्रकृति माँ से सुन्दर कुछ नहीं । इसके रंगों से ही हमारे जीवन के रंग हैं ।  हम सब धरती माँ के आभारी हैं । 










Monday, July 21, 2014

नन्हे पौधे जो बड़े पेड़ बनेंगें :)

आजकल मैं अपने  कैमरे से उन नन्हे पौधों को क्लिक कर रहा हूँ जो बड़े होकर पेड़ बनेंगें । साथ ही हैरान भी हूँ कि इतने बड़े पेड़ कभी इतने छोटे भी होते हैं । Some Clicks by me: )

 गुलमोहर 

पीपल 

आम 

Saturday, July 12, 2014

प्यारी गिलहरी

एक गिलहरी प्यारी प्यारी
भाग भाग के आती
अपने मुंह में दबा छुपा के
कितना कुछ वो लाती

झबरी पूंछ, देह पर धारी
चौकन्नी सी फिरती
उछल कूद करती वो हरदम
हंसी ख़ुशी से रहती

पकड़ हाथ में दाना चुग्गा
बैठ प्यार  से खाती
हम जो उसको पास बुलाएँ
कितना वो शरमाती

घास फूस, धागों को चुनकर
अपना घर वो बनाती
तिनके, सूखे पत्ते लाकर
घर को खूब सजाती

प्यारी प्यारी एक गिलहरी
कितना कुछ है सिखाती
करती रहती काम हमेशा
कभी न समय गंवाती             

जनसंदेश अख़बार में प्रकाशित यह प्यारी सी बाल कविता मेरी माँ ने लिखी है  | 

Tuesday, July 1, 2014

कुछ रंग- बस यूँ ही …

     आज कुछ रंग- बस  यूँ ही । जैसा  देखा सोचा वैसा ही उकेर दिया ।



घर से निकला 

बारिश आई, छाता खोला 

पार्क में खेला 

पार्क में झूला और दूसरे खेल 

 क्लासरूम में  बनाई एक ड्राइंग 

Friday, June 13, 2014

मुंबई के गुलमोहर

हरियाली हम सभी को अच्छी लगती है । खासकर गर्मियों के मौसम में । इन दिनों  मुंबई में हर ओर सुन्दर फूलों से लदे गुलमोहर के पेड़ बहुत अच्छे लग रहे हैं । तेज़ धूप और भागती  गाड़ियों के बीच चटक रंग के गुलमोहर सभी के मन भाते हैं । मेरे घर से स्कूल के रास्ते में खिले कुछ गुलमोहर … Clicks by me :)






Tuesday, May 20, 2014

Trip To Zoo

छुट्टियां चल रही हैं । मैं भी खूब एन्जॉय कर रहा हूँ । मैं इन छुट्टियों मैं कनाडा में हूँ । यहाँ पर ज़ू जाकर खूब मज़ा आया । कितने सारे जानवर देखे और उनके बारे में जाना ।

@ Edmonton Zoo  (Canada )
कई तरह के उल्लू थे वहां ...इन्हें देख बड़ा अच्छा लगा 

कुछ मंकी ट्रिक्स मेरे भी 
मैंने पोज़ तो दिया हाथीजी  ने मुंह  फेर लिया 
कंगारू ...इन्हें मैंने पहली बार देखा 

क्लिक के लिए दोनों तैयार .... ज़ेबरा को थैंक्स 
फॉक्स भी देखी
ध्यान देखा और समझा ......

अब तो मैं पढ़ सकता हूँ ..... और समझ भी 

अब थोड़ा आराम :)

Saturday, May 10, 2014

माँ की गोद...माँ का प्यार

 मेरे ब्लॉग पर आज जनसत्ता अख़बार में प्रकाशित माँ की लिखी ये प्यारी सी कवितायेँ  । दुनिया की हर माँ को ढेर सारा प्यार … :) हैप्पी मदर्स डे 

Friday, April 18, 2014

मेरी डायरी

छुट्टियां शुरू हो गयी हैं । बहुत दिनों से ब्लॉग पर भी आना नहीं  हुआ । कुछ समय पहले ही मेरे   एक्ज़ाम्स ख़त्म हुए हैं । इन दिनों मैंने डायरी लिखना शुरू किया है । दिन भर में जो करता हूँ,  जहाँ भी जाता हूँ सब इसमें लिखता हूँ ।
मेरी डायरी 

छुट्टियों का लेखा जोखा