चैतन्य शर्मा

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मैं चैतन्य एक बहुत अच्छा बच्चा हूँ | मैं 12 साल का हूँ | मुझे ड्राइंग-कलरिंग करना बहुत पसंद है | मैं क्लास VIII में पढ़ता हूँ और माँ को कभी परेशान नहीं करता | मुझे डांस करना बेहद पसंद है | स्कूल में मुझे सब बहुत पसंद करते हैं | यह ब्लॉग 10 साल पहले मेरी माँ डॉ. मोनिका शर्मा ने बनाया था । अब मैं खुद अपने पोस्ट ब्लॉग पर शेयर करता हूँ । इस ब्लॉग पर मैं अपनी सारी बातें शेयर करूंगा |

Tuesday, October 15, 2013

प्यारी हिंदी


माँ ने मुझे बहुत पहले से हिंदी लिखना सिखाना शुरू किया था | अब मुझे भी हिंदी लिखना खूब भा रहा है | मेरी स्कूल में भी टीचर को मेरी हिंदी की लिखाई बहुत पसंद आती है | 





15 comments:

ऋता शेखर 'मधु' said...

आपकी लिखावट तो बहुत अच्छी है...शुभाशीष !!

दिलबागसिंह विर्क said...

आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा 17-10-2013 को
चर्चा मंच
पर है ।
कृपया पधारें
आभार

देवेन्द्र पाण्डेय said...

:)

Maheshwari kaneri said...

बहुत बढिया ..लगे रहो..शुभकामनाएं

Vandana Ramasingh said...

वाकई यह तो बहुत सुन्दर है keep it up

Shah Nawaz said...

Waaah!!!

nayee dunia said...

नन्हे से चैतन्य की सुंदर लिखावट भरे पन्ने।

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

कल 18/10/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (18-10-2013) "मैं तो यूँ ही बुनता हूँ (चर्चा मंचःअंक-1402) पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

प्रवीण पाण्डेय said...

आप ऐसे लिखते रहिये, आपको बहुत लिखना है।

nayee dunia said...


बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा शनिवार 19/10/2013 को प्यार और वक्त...( हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : 028 )
- पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर ....

virendra sharma said...

माँ ने मुझे बहुत पहले से हिंदी लिखना सिखाना शुरू किया था |
अब मुझे भी हिंदी लिखना खूब भा रहा है |
मेरी स्कूल में भी टीचर को मेरी हिंदी की लिखाई बहुत पसंद है...
चैतन्य का कोना

सुन्दर सुलेख !

इमला लिखा करो नित बेटा ,

मैं लेटी थी ,मैं लेटी थी वो मेरे ऊपर लेटा था ,

आखिर तो मेरा बेटा था।

राजीव कुमार झा said...

सुंदर लिखावट भरे पन्ने ! क्या कहने !

डॉ. मोनिका शर्मा said...

Aap Sabhi Ka Abhar

abhi said...

So proud of you chaitanya!
बहुत खूब :)

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