चैतन्य शर्मा

My photo
मैं चैतन्य एक बहुत अच्छा बच्चा हूँ | मैं 12 साल का हूँ | मुझे ड्राइंग-कलरिंग करना बहुत पसंद है | मैं क्लास VIII में पढ़ता हूँ और माँ को कभी परेशान नहीं करता | मुझे डांस करना बेहद पसंद है | स्कूल में मुझे सब बहुत पसंद करते हैं | यह ब्लॉग 10 साल पहले मेरी माँ डॉ. मोनिका शर्मा ने बनाया था । अब मैं खुद अपने पोस्ट ब्लॉग पर शेयर करता हूँ । इस ब्लॉग पर मैं अपनी सारी बातें शेयर करूंगा |

Wednesday, October 2, 2013

My First Letter

मैंने पहली बार ये लेटर लिखा है | यह लेटर मैंने अपने पापा के लिए लिखा है | यह बताने के लिए कि वो मेरे बेस्ट फ्रेंड हैं और मैं उनसे बहुत प्यार करता हूँ | इसमें बहुत सारे स्पेलिंग मिस्टेक भी हैं पर मेरे पापा तो समझ ही जायेंगें |

22 comments:

Anupama Tripathi said...

Good effort ......God bless ...keep writing .....!!

प्रवीण पाण्डेय said...

आपका पत्र सच में बहुत प्यारा था। स्पेलिंग तो देर सबेर ठीक हो ही जायेंगी। मम्मी पापा को प्यार ऐसे ही करते रहना।

Maheshwari kaneri said...

बहुत बढिया ..ऐसे ही लिखते रहो स्पेलिंक्स अपने आप सही होजाएगा....शुभकामनाएं

Rajendra kumar said...

बहुत बढिया, आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (03-10-2013) को "ब्लॉग प्रसारण : अंक 135" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.शुभकामनाएं.

sriram roy said...

waah bhuat sundar letter...
www.sriramroy.blogspot.in

Kondaveeti Gopi said...

very nice..
wel come to my facinating world.... www.kondaveetiphotography.blogspot.com

डॉ. मोनिका शर्मा said...

@ Rajendraji.... Abhar Apka

दिलबागसिंह विर्क said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 03-10-2013 के चर्चा मंच पर है।
कृपया पधारें।
धन्यवाद ।

डॉ. मोनिका शर्मा said...

@ Dilbagji ....Abhar Apka

ताऊ रामपुरिया said...

पत्र लिखना बहुत ही अच्छी आदत साबित होगी आगे जाकर, बहुत बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

Anonymous said...

too good

मेरा मन पंछी सा said...

बहुत अच्छे ..
:-)

HARSHVARDHAN said...

ऐसे ही लिखते चलो चैतन्य।। :)

virendra sharma said...

जो सदैव ही चैतन्य है वह सच्चिदानंद (सत -चित -आनंद )है। वैसे आनंद भी परमात्मा का ही एक नाम है इसीलिए तो हम सब भी जीवन में आनंद चाहते हैं। क्योंकि हम स्वयं परमात्मा के अंश हैं और अंशी की तरफ अंश वैसे ही आकर्षित होता है जैसे माँ की तरफ शिशु।

वर्तनी की अशुद्धियाँ स्पेलिंग मिस्टेक्स मायने नहीं रखतीं हैं असल बात है लिखा गया। भाषा आनी चाहिए वर्तनी फिर पीछे पीछे चली आती है। ब्लॉग पर तो सब अशुद्ध ही लिख रहें हैं बड़े बड़े बड़े से भी बड़े चैतन्य तो छोटा सा बच्चा है। शुक्रिया आप नन्ने मुन्ने पे आये आपका ही ब्लॉग है ये फिर आना। नेहा -दुलार !

virendra sharma said...


परमात्मा को "परम सत्य" भी कहते हैं सत माने सत्य है यहाँ ।

Anand Rathore said...

bahut sunder ...

Vandana Ramasingh said...

wow !!! very touching .....god bless you :)

Ranjana's craft blog said...

Oh...missing your Dad so much...reading your letter your Dad will come running to you... :-)

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

कल 06/10/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

विभा रानी श्रीवास्तव said...

प्यार मेरे समझ में भी आया
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें

Praharsh Prasoon said...

good effort...keep writing...

abhi said...

So lovely :) :)
God bless you chaitnya :)

Post a Comment