चैतन्य शर्मा

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मैं चैतन्य, 17 साल का हूँ | मैं कॉलेज में पढ़ता हूँ | यह ब्लॉग 15 साल पहले मेरी माँ डॉ. मोनिका शर्मा ने बनाया था । अब मैं खुद अपने पोस्ट मेरे इस ब्लॉग पर शेयर करता हूँ ।

Friday, October 17, 2014

Two Drawings






Wednesday, October 8, 2014

मेरी लिखी पहली ब्लॉगपोस्ट ....

Please click the picture to read the post.

Thursday, September 18, 2014

चार साल का हुआ चैतन्य का कोना



Happy Birth To My Blog .....Thanks to all of you :)


Thanks A Lot
'चैतन्य का कोना' आज चार साल का हो गया । इन चार सालों में चैतन्य के बचपन के सभी रंग इस ब्लॉग पर साझा किये और उसे आप सबका भरपूर स्नेह मिला । इन चार सालों में चैतन्य के ब्लॉग को नियमित अपडेट करने और नया सोचने के विचार ने मुझे भी उसकी रचनात्मकता और कल्पनाशीलता से जोड़े रखा । काफी हद तक नियमितता बनी भी रही | आज ये ब्लॉग एक जीवंत पेरेंटिंग डायरी सा हो गया है जिसमें चैतन्य के बचपन के रंगों को लिए एक-एक पन्ना बस यूँ ही जुड़ता चला गया । चैतन्य को दिए स्नेह और सराहना के लिए आप सभी का ह्रदय के आभार.....
                                                                                                                                          (चैतन्य की माँ )


Tuesday, September 16, 2014

हँसती मुस्कुराती तितली


बताइये कैसी है :)

Wednesday, September 3, 2014

My Click In Magzine

जीवन मैग मैगज़ीन में मेरी क्लिक की हुई  फोटो को 'फोटो ऑफ़ द मंथ' कॉलम में शामिल किया गया है । आप भी देखिये , A Click By Me :)


In Jeevan Mag


Sunday, August 17, 2014

ओ कान्हा सिखलाओ ना

जन्माष्टमी की शुभकामनाएं आप सभी को । आज मेरी बनाई कान्हा की ड्राइंग और मां की लिखी कविता ।


कैसे जीतें  जीवन रण को 
उल्लासित करलें हर क्षण को
ओ कान्हा सिखलाओ ना

कैसे झट मैया को मना लें 
प्यारी प्यारी बातें बना लें
ओ कान्हा बतलाओ ना

संकट में भी मुस्काएं हम
रीति नीति सब पायें हम
ओ कान्हा समझाओ ना

सखा भाव को कभी ना भूलें
प्रकृति माँ की गोद में झूलें
ओ कान्हा सिखलाओ ना



Thursday, August 7, 2014

बंदर भैया


बंदर भैया बदले बदले
लटक-मटक कर चलते 
कभी तो चलते सीधे सीधे 
कभी घूम के  पलटते

अम्मा पूछे, बेटा बंदर 

अजब गजब हैं कपड़े पहने 
नए नए से लगते हो तुम 
हाथ कान में गहने पहने 

बंदर बोला मैं तो अम्मा 

कैटवॉक करूंगा 
छोड़ूंगा पेड़ों पर चढ़ना
स्टाइल  से चलूँगा  

अम्मा बोली बंदर बेटा 

क्या तेरे मन में आया 
उछाल कूद छोड़कर यूं 
बिल्ली बनना क्यों भाया   


नेशनल दुनिया अख़बार में प्रकाशित यह कविता मेरी माँ ने लिखी है । 

Sunday, July 27, 2014

आओ सहेजें धरा को

आज  World Nature Conservation Day है । प्रकृति को बचाने  और सहेजने का सन्देश देने वाला खास दिन । पर धरती माँ  पेड़ों पौधों को सहेजने के लिए तो हर दिन खास है क्योंकि प्रकृति माँ से सुन्दर कुछ नहीं । इसके रंगों से ही हमारे जीवन के रंग हैं ।  हम सब धरती माँ के आभारी हैं । 










Monday, July 21, 2014

नन्हे पौधे जो बड़े पेड़ बनेंगें :)

आजकल मैं अपने  कैमरे से उन नन्हे पौधों को क्लिक कर रहा हूँ जो बड़े होकर पेड़ बनेंगें । साथ ही हैरान भी हूँ कि इतने बड़े पेड़ कभी इतने छोटे भी होते हैं । Some Clicks by me: )

 गुलमोहर 

पीपल 

आम 

Saturday, July 12, 2014

प्यारी गिलहरी

एक गिलहरी प्यारी प्यारी
भाग भाग के आती
अपने मुंह में दबा छुपा के
कितना कुछ वो लाती

झबरी पूंछ, देह पर धारी
चौकन्नी सी फिरती
उछल कूद करती वो हरदम
हंसी ख़ुशी से रहती

पकड़ हाथ में दाना चुग्गा
बैठ प्यार  से खाती
हम जो उसको पास बुलाएँ
कितना वो शरमाती

घास फूस, धागों को चुनकर
अपना घर वो बनाती
तिनके, सूखे पत्ते लाकर
घर को खूब सजाती

प्यारी प्यारी एक गिलहरी
कितना कुछ है सिखाती
करती रहती काम हमेशा
कभी न समय गंवाती             

जनसंदेश अख़बार में प्रकाशित यह प्यारी सी बाल कविता मेरी माँ ने लिखी है  |