मत रूठो हे धरती माता
तुम तो हो जीवन की दाता
तेरा आँचल सब कुछ देता
हमसे नहीं कभी कुछ लेता
तेरी गोदी घर हम सबका
इसमें जोड़ें तिनका तिनका
तुमसे ही यह सृष्टि रची है
फिर क्यूँ उथलपुथल मची है.
क्षमा करो माँ .... यूँ कहर बन टूटो ना ...
हे प्रकृति माँ रूठो ना..... हे प्रकृति माँ रूठो ना....
यह पंक्तियाँ मेरी ममा ने लिखी हैं.................. भूकंप का दर्द झेल रहे जापानवासियों के साथ हैं हम सबकी हार्दिक संवेदनाएं.......... :(


